Friday, May 21, 2010

azaadi ?........................

 १५ अगस्त का दिन , बारिस अच्छी हे जैसे ही में स्कूल जाने वाली सड़क पर पहुंचा ,एक ९-१० साल का लड़का खाकी नेकर पहने था ऊपर का बदन नंगा भीगा हुआ सा हाथ में पोलीथिन की बड़ी सी थेली, थेली में कागज के बहुत सारे तिरंगे ध्वज  लिए निम् के पेड़ के निचे खड़ा था खुद भले ही गीला हो रहा था किन्तु तिरंगे  को बचा कर रख रहा था , मेने पूछा रे यहाँ गीला क्यों हो रहा हे सुबह- सुबह , बोला बाबूजी आज जंडे का दिन हे ना इसलिए ये                              
   जंडे बेच रहा हु थोड़ी देर बाद बड़ी  स्कूल के बच्चे  आएंगे गले में पट्टा बाँधे  ये zanda  खरीदेंगे थोड़ी देर देश भक्ति- देशभक्ति खेलेंगे फिर   गीला हो जायेंगा तो फेक देंगे फिरसे खरींदेगे हाथ में बंधने के लिए  वो बोला बाबूजी ये जंडे का दिन साल में १  बार ही क्यों आता हे? रोज़ नहीं आता मेने पूछा क्यों? क्या हुआ वो बोला बाबूजी आज के दिन जंडे बिकने से दोनों समय का खाना मिल जाता हे मेने सोचा चलो आज़ादी का एक दिन तो तय हुआ लेकिन ध्वजारोहण के बाद वो भी आम दिन हो जाता हे और ध्वज fahranne वाला  गाड़ी में बैठ कर हमारे चेहरों पर धुल
  उड़कर आजादी की बधाई दे जाता हे .....................................................................fhoto curtsy ....photos.merinews.com/..........

Tuesday, May 18, 2010

हेल्लो दोस्तों आज में आपको मेरे बारे में कुछ बताना चाहता हु मेरा जन्म मुंबई में हुआ उसके बाद क्लास चार तक राजस्थान में कांकरोली में पढाई की पिताश्री फिर मुंबई ले गए और फिर बी.कॉम और एल एल.बी तक वही से की में अपने मम्मी पापा से बहुत प्यार करता हु किन्तु मेरा दुर्भाग्य हे की वो अब इस दुनिया में नहीं हे मैने १९८९ से १९९० तक बॉक्स ऑफिस ट्रेड मेगजीन में रिपोर्टर के पद पर कार्य किया कवी सम्मलेन सुनने का शोक बचपन से ही था आजाद मैदान में रात रात भर बैठ कर कविताए सुनता रहता था मैने कभी सोचा भी नहीं था की उन महान कविओ के साथ मैभी कभी मंच पर बैठ कर कविता पढूंगा लेकिन ये सपना भी पूरा हुआ इसका पूरा श्रेय जाता हे मेरे मम्मी पप्पा और आदरणीय बुद्धि प्रकाशजी दाधीच को, में सरद जी जोशी के व्यंग लेख से प्प्रभावित हु और लिखने की कोशिश करता हु बुद्धि प्रकाशजी मुजे मंच पर लाये और मेरी प्रतिभा को निखारा राजस्थान में आने के बाद उन्होंने मेरी जिन्दगी में चमत्कार ला दिया आज तक मैने करीब करीब १००० कविसम्मेलन में काव्य पाठ किया हे मेरी पत्नी मधु ने हमेशा मेरा मनोबल बढाया हे मेरे दोस्तों में करीब जो हे वो हे जीतू हेमा, धर्मेन्द्र, देव, परेश, अतुल, नरेश, राजू , कन्ना बाबा , प्प्रह्लाद, चिरंजीव , मेरी कविता को सबसे पहले सुनने की रिस्क मेरे बड़े भाई योगेशजी उठाते हे मैने कॉलेज में कई ड्रामा का निर्देसन भी किया हे अब आगे अगले अंक में इतना पढ़ कर एनासिन लेना मत भूलना

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Hasya Kavi Sunil Vyas
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Saturday, May 15, 2010

एक व्यंग लेख


हास्य व्यंग
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अध्यापक विद्यालय में पढाते हुए पकड़ा गया
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प्रधानमंत्री ने घोषणा की हम सम्पूर्ण भारत में शिक्षा का अधिकार लागु करेंगे शिक्षा का स्तर ऊँचा उठाएँगे। इतना उचा उठाएँगे की आम आदमी तो उसके बारे में सोच भी नहीं सकता

राज्य शिक्षा मंत्री बोले हम पुरे प्रदेश में गाव गाव में ,ठानी ठानी में स्कूल खोलेंगे प्र्वेत्सौत्सव मानेंगे सर्वे करवाएँगे चाइल्ड को ट्रैक करेंगे उन्होंने आर्डर प्रशासन को दिया प्रशासन ने जिला शिक्षा अधिकारी को दिया अधिकारिओ ने अध्यापको को दिया और अभियान ढोल नगाडो से चालू हुआ अध्यापक स्कूल छोड़ गाव में गए सर्वे किया जिला निर्वाचन ने एक काम और लाद दिया बोले गाव में जा ही रहे हो तो मतदाता सूचि भी बना लेना चिकित्सा विभाग बोला लगे हाथ पोलियो की खुराख भी पिला देना लीजिये काम सुरु,

अधिकारिओ का दौरा चालू , जिला शिक्षा अधिकारी ने ऑफिस के बाबु और उनके खास अध्यापक (जिसने जिन्दगी भर पढ़ाने के अलावा सभी काम किये जेसे साब के गैस भरवाना बाज़ार से सब्जी लाना आदि आदि अनंत अनंत ) जो काम को पूजा मानता था उसको साथ लेकर एक सुदूर विद्यालय पहुंचे।

स्कूल एकदम शांत. कही से कोई आवाज नहीं, अधिकारी का दिमाग ख़राब कार्यालय में भी कोई नहीं सरे के सरे अध्यापक कक्षाओ में अधिकारी को गुस्सा आया तुरंत प्रधानाध्यापक व् अन्य को कक्षा से बुलाया बोले ये क्या हो रहा हे ,तुम पढ़ा रहे हो ? बच्चो को बिगाड़ रहे हो ड्रॉप आउट हो जायेंगे तो कौन जवाब देगा क्या हमें तुम्हे पढ़ाने के लिए कहाँ हे समज में नहीं आता तुम अध्यापक होकर भी पढ़ा रहे हो ? फ़ोकट के काम में भेजा मत फोड़ो जाओ बच्चो को स्कूल से जोड़ो अगली बार आंकड़े नहीं मिले और पढाते हुए पाए गए तो अनुशासनात्मक कार्यवाही की जायगी या १७ सी सी का नोटीस दिया जायेगा माडसाब कुछ तो सोचो अब आपका कैडर बढ़ गया हे इमानदारी से काम करोंगे तो पटवारी औरसचिव से भी ज्यादा इज्जत पाओंगे समजो समजो माडसाब अब आपका काम पढ़ाने का नहीं ,सर्वे करना गावो में जाकर आंकड़े इक्कठे करना ! सरकार शिक्षा के लिए कितना कुछ कर रही हे ? सरकार अशिक्षा, अज्ञानता को दूर करने के लिए दिनरात एक कर रही हे और आप हो की पढ़ा रहे हो तुम तो मरोंगे जो मरोंगे हमें भी मरवओंगेचलो जाओ अभी से ऑफिस में बेठकर डाक बनाओ १०० प्रतिसत साक्षरता दिखाओ माडसाब बोले साब वो गाव वाले आते हे जगडा करते हुए बोलते हे की हमारे बच्चो को क्यों नहीं पढाते हो साहब बोले कच्चे मास्टर जी हो कहते क्यों नहीं की सरकारी स्कूल हे सरकारी काम हे जैसा सरकार चाहेगी वैसे ही होगा हो सके तो घर जाओ क्योंकि जल्दी ही वापस शिक्षा आपके द्वार आएगी


दुसरे दिन अख़बार में खबर आई जिला शिक्षा अधिकारी ने आकस्मिक निरिक्षण किया ४ अध्यापक पढाते हुए पकडे गए

Friday, May 14, 2010


आज का अंतिम शेर
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हम होते रहे धनवान ,ईमान बदल बदल कर

चलती रही सरकारे , फरमान बदल बदल कर

और मंहगाई का कुछ असर हम पर न हो सका

हम लेते रहे उधार , दूकान बदल बदल कर

जो होठ आज मुस्कुराते है

आंसुओ की याद दिलाते हे

aaj ka taza doha

kavita kam molik hui

jokes manch par chhaay

maa ke dudh par

bhari hui jyo biwi ki chaay (tea)

Saturday, May 1, 2010

MAI SHAYAR TO NAHI
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AAJ SE MAI FUNNY SHAYRI POST KAR RAHA HU
bhukhe pet rat katni nahi he

kaise khaya vada pav chatni nahi he

or usase mar kha raha he bevkuf

vo teri premika he patni nahi he

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