Sunday, October 31, 2010

AKHIL BHARTIYA KAVISAMMELAN

उदयपुर. दशहरा दीपावली मेले के तीसरे दिन आयोजित काव्य निशा में कवियों ने शहर के श्रोताओं की खूब वाह वाही लूटी।


व्यंग्य के तीरों ने व्यवस्था की नाकामियों को उजागर किया तो हास्य ने पेट में बल ला दिए। कवि सम्मेलन में हास्य रस की मूसलाधार होती रही।

समय से पहले जुटे शहरवासी: कवि सम्मेलन शुरू होने से पहले ही लोगों की भीड़ जुटना शुरू हो गई। लोग अपनी जगह पक्की कर कवि सम्मेलन शुरू होने का इंतजार करने लगे। पिछले कार्यक्रमों की तुलना में शनिवार रात ज्यादा भीड़ रही।

हास्य कवियों ने मारी बाजी: कवि सम्मेलन में हास्य कवियों ने बाजी मारी। हास्य कवियों की प्रस्तुति के दौरान शहरवासियों ने जमकर तालियां बजाई और वंस मोर भी किया। कार्यक्रम से पूर्व सभापति रजनी डांगी ने स्थानीय कवियों को भी प्रस्तुति देने का मौका दिया।

पं. सुनील व्यास, कांकरोली

जब मुस्कुराहटों को आंसुओं के थपेड़े मार जाते हैं, जब हम जिंदगी की जंग हार जाते हैं। तब वो संकटमोचन कहता है, घबरा मत मैं हूं ना।

श्रीनंद किशोर अकेला, आलोट

पहले के नेता खून मांगते थे, आजकल के नेता खून मांगते नहीं निचोड़ लेते हैं और आजकल के नेता आजादी का फल पकने से पहले ही तोड़ लेते हैं।

अनिल तेजस, टीकमगढ़

हिंदू है तो धर्य न खोना, श्रीराम का ध्यान करो, मुस्लिम हो ईमान न खोना, पैगंबर का मान करो। आपस में लड़ते रहने से देश नहीं चल पाएगा।

शांति तूफान, निंबाहेड़ा

हिंदुस्तान के लोग गजब कर गए, भूख से मर गए, मैंने कहा बेवकूफों कुछ सब्र करते। मरना ही था तो पूरी शान से मरते किसी भ्रष्ट नेता की हत्या करके आत्मसमर्पण कर देते।

धर्मेद्र सोनी, कोटा

खाए केला गुरु अकेला फेंके छिलका रिपटे चेला कितना भी पढ़ लो तुम्हारे भविष्य हमारी अंगुलियों पर नाचते हैं क्योंकि यूनिवर्सिटी की कॉपियां हम छठीं पास ही जांचते हैं।

रास बिहारी गौड़, अजमेर

मोबाइल से कैसे-कैसे चमत्कार हो रहे है, बच्चे कवरेज एरिया से बाहर हो रहे हैं। आतंकवादी छूटने का गम नहीं, कैच छूटना हादसे से कम नहीं।

माणिक वर्मा, भोपाल

भारत बंद के दौरान एक व्यक्ति चड्डी पहन कर सड़क पर आया, लोगों ने पूछा तो उसने कारण बताया कि विरोध और समर्थन मिला जुला है, बंद समझो तो बंद नहीं तो खुला है ।

अनिल बोहरे

भारत के सभी दल हो जाते हैं कभी कभी नेक, सांसद के वेतन वृद्धि प्रस्ताव पर सब थे एक। यह एकता बढ़ती जावे, पार लगे देश की नैया, कांग्रेस और भाजपा राष्ट्रहित में एक हो भैया। यार मेज में हैं, दिलदार मजे में हैं, बिन ब्याह बच्चे हुए, परिवार मजे हैं। अमेरिका मंगल के बारे में थोड़ा सा क्या जान गया। अपने को हम चौड़ा और बाजार संकड़ा ही मान गया।

Wednesday, October 27, 2010

kokata me kaya path
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Sunday, October 10, 2010

SUBHKAMNA


shree buddhiprakash ji aapko lakh lakh badhaiya aapne apne kadmo par chal kar manzil ka rasta dundha mana ki abhi to sirf angdai he manzil ki aahat abhi baki he kher sharjah or dubai me jordar performance ke liye bhir se badhai
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Saturday, June 5, 2010

MAA

आज मम्मी की पुण्य तिथि में इस अवसर पर माँ पर कोई लम्बी चोडी कविता ना लिखकर केवल दो पंक्तियों में अपनी बात कहता हु जहाँ तक में मानता हु कविता दो पंक्तियों में भी पूरी हो जाती हे  लीजिये मेरी छोटी सी कविता उन सब के लिए जो मेरे जेसे हे

माँ क्या होती हे , यह उनसे पूछो

जिनके माँ नहीं होती हे .

Friday, June 4, 2010

HAMARA VIKASH (our development) a vyang lekh

हमने विकाश कर लिया एसा लगभग कुछ समय से लग रहा हे, या हो गया ,जो हो जाता हे उसको कर लेना भी एक महान कार्य हे
महान इसलिए की महान हे अब यो क्यों हे यह जानना जरुरी नहीं हे , हमारे अखबारों ने ,टीवी चेन्नल ने , उन परम्परागत पुराने विषयों को छोड़ दिया जिनसे हम घबराते थे या जिनसे पार्टी सत्ता में आती थी अब पूरा हिंदुस्तान इन टी वि चेंनलो के कारण खुश हे  की हमने विकाश  कर लिया हम गुड फिल करने लगे पहले ग़रीबो,बेरोजघारो पर चर्चा होती थी जूठ मुठ ही सही विचार तो होता था ,अब नहीं होता ये विषय  ही ख़त्म हो गया सारा समाज चिंतित था अब नहीं हे . हमने सीने पर  हुए फोड़े पर कुरता पहन लिया हम कुरते में सुंदर दिखने लगे जेसा वो दिखाते हे हम देखते हे , जेसा वो सुचवाते  हे हम सोचते हे ,

पिछले दिनों पूरा भारत परेशान था समज  में नहीं आ रहा था अब क्या होगा अख़बार वाले टी वि वाले लगातार नज़र रख रहे थे बार बार यही दिखाया जा रहा था आम जनता परेशान हे क्या करे ,क्या नहीं करे, निर्णय नहीं ले पा रही थी की सानिया की शादी होगी या नहीं और होगी तो केसे होगी , अब जब देश में इतनी भारी टेंशन हो तो गरीबी,नक्सलवाद,बेरोजगारी,के बारे  में  कैसे  सोचे अब पहले सानिया की शादी से निपटे की इन फालतू समस्या से, सानिया से, समस्या का क्या हे वो तो ६० सालो में नहीं निपटी तो अब क्या निपटेगी ,दरअसल हम भारतीय भोले लोग हे इतने भोले की पड़ोस में रामलाल की शादी भी होतो हम नाचना शुरू कर देते हे खेर हम भी घर की शादी का जश्न भूलकर टी वि पर सानिया की शादी देखने लग गए( आखिर हमने विकाश करलिया )

Thursday, June 3, 2010

vishesh safai abhiyan

में दफ्तर पहुंचा ठीक ११.४० मिनट पर यही हम कर्तव्यनिस्थ का standerd टाइम हे दफ्तर में गया तो वहां कोई नहीं था एकदम सन्नाटा मेने चपड़ासी  को घर पर फोन किया वो नहा रहा था . मुजे एहसास हुआ की वो मुजसे भी ज्यादा कर्तव्यनिस्थ निकला थोड़ी देर बाद उसका फ़ोन आ गया बोला बाबूजी क्या बात हे क्यों क्यों सुबह सुबह परेशां कर रहे हो मेने कहा रे आज दफ्तर में कोई नहीं हे क्या बात हे बोला बाबूजी आपका तो दिमाग ख़राब हे कल सी. एम्. साहब ने क्या कहा था मालूम नहीं? मेने कहा नहीं ,वो बोला सी. एम्. साहब ने कहा था आज से पुरे  प्रदेश में विशेष सफाई अभियान चलाया जायेगा ,  इसलिए सब के सब साफ हो गए.

Friday, May 21, 2010

azaadi ?........................

 १५ अगस्त का दिन , बारिस अच्छी हे जैसे ही में स्कूल जाने वाली सड़क पर पहुंचा ,एक ९-१० साल का लड़का खाकी नेकर पहने था ऊपर का बदन नंगा भीगा हुआ सा हाथ में पोलीथिन की बड़ी सी थेली, थेली में कागज के बहुत सारे तिरंगे ध्वज  लिए निम् के पेड़ के निचे खड़ा था खुद भले ही गीला हो रहा था किन्तु तिरंगे  को बचा कर रख रहा था , मेने पूछा रे यहाँ गीला क्यों हो रहा हे सुबह- सुबह , बोला बाबूजी आज जंडे का दिन हे ना इसलिए ये                              
   जंडे बेच रहा हु थोड़ी देर बाद बड़ी  स्कूल के बच्चे  आएंगे गले में पट्टा बाँधे  ये zanda  खरीदेंगे थोड़ी देर देश भक्ति- देशभक्ति खेलेंगे फिर   गीला हो जायेंगा तो फेक देंगे फिरसे खरींदेगे हाथ में बंधने के लिए  वो बोला बाबूजी ये जंडे का दिन साल में १  बार ही क्यों आता हे? रोज़ नहीं आता मेने पूछा क्यों? क्या हुआ वो बोला बाबूजी आज के दिन जंडे बिकने से दोनों समय का खाना मिल जाता हे मेने सोचा चलो आज़ादी का एक दिन तो तय हुआ लेकिन ध्वजारोहण के बाद वो भी आम दिन हो जाता हे और ध्वज fahranne वाला  गाड़ी में बैठ कर हमारे चेहरों पर धुल
  उड़कर आजादी की बधाई दे जाता हे .....................................................................fhoto curtsy ....photos.merinews.com/..........

Tuesday, May 18, 2010

हेल्लो दोस्तों आज में आपको मेरे बारे में कुछ बताना चाहता हु मेरा जन्म मुंबई में हुआ उसके बाद क्लास चार तक राजस्थान में कांकरोली में पढाई की पिताश्री फिर मुंबई ले गए और फिर बी.कॉम और एल एल.बी तक वही से की में अपने मम्मी पापा से बहुत प्यार करता हु किन्तु मेरा दुर्भाग्य हे की वो अब इस दुनिया में नहीं हे मैने १९८९ से १९९० तक बॉक्स ऑफिस ट्रेड मेगजीन में रिपोर्टर के पद पर कार्य किया कवी सम्मलेन सुनने का शोक बचपन से ही था आजाद मैदान में रात रात भर बैठ कर कविताए सुनता रहता था मैने कभी सोचा भी नहीं था की उन महान कविओ के साथ मैभी कभी मंच पर बैठ कर कविता पढूंगा लेकिन ये सपना भी पूरा हुआ इसका पूरा श्रेय जाता हे मेरे मम्मी पप्पा और आदरणीय बुद्धि प्रकाशजी दाधीच को, में सरद जी जोशी के व्यंग लेख से प्प्रभावित हु और लिखने की कोशिश करता हु बुद्धि प्रकाशजी मुजे मंच पर लाये और मेरी प्रतिभा को निखारा राजस्थान में आने के बाद उन्होंने मेरी जिन्दगी में चमत्कार ला दिया आज तक मैने करीब करीब १००० कविसम्मेलन में काव्य पाठ किया हे मेरी पत्नी मधु ने हमेशा मेरा मनोबल बढाया हे मेरे दोस्तों में करीब जो हे वो हे जीतू हेमा, धर्मेन्द्र, देव, परेश, अतुल, नरेश, राजू , कन्ना बाबा , प्प्रह्लाद, चिरंजीव , मेरी कविता को सबसे पहले सुनने की रिस्क मेरे बड़े भाई योगेशजी उठाते हे मैने कॉलेज में कई ड्रामा का निर्देसन भी किया हे अब आगे अगले अंक में इतना पढ़ कर एनासिन लेना मत भूलना

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Hasya Kavi Sunil Vyas
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Saturday, May 15, 2010

एक व्यंग लेख


हास्य व्यंग
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अध्यापक विद्यालय में पढाते हुए पकड़ा गया
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प्रधानमंत्री ने घोषणा की हम सम्पूर्ण भारत में शिक्षा का अधिकार लागु करेंगे शिक्षा का स्तर ऊँचा उठाएँगे। इतना उचा उठाएँगे की आम आदमी तो उसके बारे में सोच भी नहीं सकता

राज्य शिक्षा मंत्री बोले हम पुरे प्रदेश में गाव गाव में ,ठानी ठानी में स्कूल खोलेंगे प्र्वेत्सौत्सव मानेंगे सर्वे करवाएँगे चाइल्ड को ट्रैक करेंगे उन्होंने आर्डर प्रशासन को दिया प्रशासन ने जिला शिक्षा अधिकारी को दिया अधिकारिओ ने अध्यापको को दिया और अभियान ढोल नगाडो से चालू हुआ अध्यापक स्कूल छोड़ गाव में गए सर्वे किया जिला निर्वाचन ने एक काम और लाद दिया बोले गाव में जा ही रहे हो तो मतदाता सूचि भी बना लेना चिकित्सा विभाग बोला लगे हाथ पोलियो की खुराख भी पिला देना लीजिये काम सुरु,

अधिकारिओ का दौरा चालू , जिला शिक्षा अधिकारी ने ऑफिस के बाबु और उनके खास अध्यापक (जिसने जिन्दगी भर पढ़ाने के अलावा सभी काम किये जेसे साब के गैस भरवाना बाज़ार से सब्जी लाना आदि आदि अनंत अनंत ) जो काम को पूजा मानता था उसको साथ लेकर एक सुदूर विद्यालय पहुंचे।

स्कूल एकदम शांत. कही से कोई आवाज नहीं, अधिकारी का दिमाग ख़राब कार्यालय में भी कोई नहीं सरे के सरे अध्यापक कक्षाओ में अधिकारी को गुस्सा आया तुरंत प्रधानाध्यापक व् अन्य को कक्षा से बुलाया बोले ये क्या हो रहा हे ,तुम पढ़ा रहे हो ? बच्चो को बिगाड़ रहे हो ड्रॉप आउट हो जायेंगे तो कौन जवाब देगा क्या हमें तुम्हे पढ़ाने के लिए कहाँ हे समज में नहीं आता तुम अध्यापक होकर भी पढ़ा रहे हो ? फ़ोकट के काम में भेजा मत फोड़ो जाओ बच्चो को स्कूल से जोड़ो अगली बार आंकड़े नहीं मिले और पढाते हुए पाए गए तो अनुशासनात्मक कार्यवाही की जायगी या १७ सी सी का नोटीस दिया जायेगा माडसाब कुछ तो सोचो अब आपका कैडर बढ़ गया हे इमानदारी से काम करोंगे तो पटवारी औरसचिव से भी ज्यादा इज्जत पाओंगे समजो समजो माडसाब अब आपका काम पढ़ाने का नहीं ,सर्वे करना गावो में जाकर आंकड़े इक्कठे करना ! सरकार शिक्षा के लिए कितना कुछ कर रही हे ? सरकार अशिक्षा, अज्ञानता को दूर करने के लिए दिनरात एक कर रही हे और आप हो की पढ़ा रहे हो तुम तो मरोंगे जो मरोंगे हमें भी मरवओंगेचलो जाओ अभी से ऑफिस में बेठकर डाक बनाओ १०० प्रतिसत साक्षरता दिखाओ माडसाब बोले साब वो गाव वाले आते हे जगडा करते हुए बोलते हे की हमारे बच्चो को क्यों नहीं पढाते हो साहब बोले कच्चे मास्टर जी हो कहते क्यों नहीं की सरकारी स्कूल हे सरकारी काम हे जैसा सरकार चाहेगी वैसे ही होगा हो सके तो घर जाओ क्योंकि जल्दी ही वापस शिक्षा आपके द्वार आएगी


दुसरे दिन अख़बार में खबर आई जिला शिक्षा अधिकारी ने आकस्मिक निरिक्षण किया ४ अध्यापक पढाते हुए पकडे गए

Friday, May 14, 2010


आज का अंतिम शेर
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हम होते रहे धनवान ,ईमान बदल बदल कर

चलती रही सरकारे , फरमान बदल बदल कर

और मंहगाई का कुछ असर हम पर न हो सका

हम लेते रहे उधार , दूकान बदल बदल कर

जो होठ आज मुस्कुराते है

आंसुओ की याद दिलाते हे

aaj ka taza doha

kavita kam molik hui

jokes manch par chhaay

maa ke dudh par

bhari hui jyo biwi ki chaay (tea)

Saturday, May 1, 2010

MAI SHAYAR TO NAHI
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AAJ SE MAI FUNNY SHAYRI POST KAR RAHA HU
bhukhe pet rat katni nahi he

kaise khaya vada pav chatni nahi he

or usase mar kha raha he bevkuf

vo teri premika he patni nahi he

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Saturday, February 13, 2010

कवि सुनिल व्यास के ब्लाग पर स्वागत

आप सभी का कवि सुनिल व्यास के हिन्दी ब्लाग पर स्वागत है ! यहां पर मे अब से अपनी रचनाओं का लेखन चालू कर रहा हु ! इस हेतु आप सभी का सहयोग भी चाहता हुं !